श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 322
 
 
श्लोक  13.15.322 
आदित्यानां भवान् विष्णुर्वसूनां चैव पावक:।
पक्षिणां वैनतेयस्त्वमनन्तो भुजगेषु च॥ ३२२॥
 
 
अनुवाद
आप आदित्यों में विष्णु हैं। आप वसुओं में अग्नि हैं। आप पक्षियों में विनतानंदन गरुड़ हैं और सर्पों में अनंत (शेषनाग) हैं।
 
You are Vishnu among the Adityas. You are Agni among the Vasus. You are Vinatanandan Garuda among the birds and Ananta (Sheshnaag) among the snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)