श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 320
 
 
श्लोक  13.15.320 
पर्वतानां भवान् मेरुर्नक्षत्राणां च चन्द्रमा:।
वसिष्ठस्त्वमृषीणां च ग्रहाणां सूर्य उच्यते॥ ३२०॥
 
 
अनुवाद
पर्वतों में आप मेरु हैं। नक्षत्रों में आप चन्द्रमा हैं। ऋषियों में आप वसिष्ठ हैं और ग्रहों में आप सूर्य कहलाते हैं।
 
Among the mountains you are Meru. Among the stars you are the Moon. Among the sages you are Vasishtha and among the planets you are called the Sun.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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