श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.15.32 
त्वया द्वादशवर्षाणि व्रतीभूतेन शुष्यता।
आराध्य पशुभर्तारं रुक्मिण्यां जनिता: सुता:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
‘तुमने बारह वर्षों तक उपवास करके तथा अपना शरीर सुखाकर भगवान पशुपति की आराधना की और रुक्मिणी देवी के गर्भ से अनेक पुत्र उत्पन्न किये।
 
‘You worshipped Lord Pashupati by fasting for twelve years and drying up your body, and produced several sons from the womb of Rukmini Devi.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas