श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 317
 
 
श्लोक  13.15.317 
त्वं नो गतिश्च श्रेष्ठश्च त्वमेव हृदयं तथा।
त्वं ब्रह्मा सर्वदेवानां रुद्राणां नीललोहित:॥ ३१७॥
 
 
अनुवाद
आप ही हमारी गति हैं, आप ही श्रेष्ठ हैं और आप ही हमारे हृदय हैं। आप ही देवताओं में ब्रह्मा हैं और रुद्रों में नील-लोहिता हैं ॥317॥
 
You are our speed, you are the best and you are our heart. You are Brahma among all the gods and Neela-Lohita among the Rudras. ॥ 317॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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