श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 316
 
 
श्लोक  13.15.316 
ईशानाय भवघ्नाय नमोऽस्त्वन्धकघातिने।
नमो विश्वाय मायाय चिन्त्याचिन्त्याय वै नम:॥ ३१६॥
 
 
अनुवाद
आप सबके स्वामी हैं, संसार के बंधनों को नष्ट करने वाले हैं और अंधक नामक राक्षस के संहारक हैं। आपको नमस्कार है। आप सम्पूर्ण मायास्वरूप हैं और चिन्तनीय तथा अचिन्तनीय स्वरूप हैं। आपको नमस्कार है॥ 316॥
 
You are the Lord of all, the destroyer of the bondages of the world and the killer of the demon Andhaka. Salutations to you. You are the form of complete illusion and the form of thinkable and unthinkable. Salutations to you.॥ 316॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)