श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 313
 
 
श्लोक  13.15.313 
ब्रह्मशिरोपहर्ताय महिषघ्नाय वै नम:।
नम: स्त्रीरूपधाराय यज्ञविध्वंसनाय च॥ ३१३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा का सिर काटने वाले और भैंसे का नाश करने वाले आपको नमस्कार है। आप स्त्री रूप धारण करते हैं और यज्ञों का नाश करने वाले हैं। आपको नमस्कार है। ॥313॥
 
Salutations to you, who cut off Brahma's head and destroyed the buffalo. You take the form of a woman and are the destroyer of sacrifices. Salutations to you. ॥ 313॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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