श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 311
 
 
श्लोक  13.15.311 
नम: सुरासुरेशाय विश्वेशाय नमो नम:।
नम: पवनवेगाय नम: पवनरूपिणे॥ ३११॥
 
 
अनुवाद
आप देवताओं और दानवों के स्वामी हैं। आपको नमस्कार है। आप सम्पूर्ण जगत के ईश्वर हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। आप वायु के समान वेगवान हैं और वायु के ही स्वरूप हैं। आपको नमस्कार है, आपको नमस्कार है ॥311॥
 
You are the lord of the gods and demons. Salutations to you. You are the God of the entire universe. Salutations to you again and again. You are as fast as the wind and are in the form of the wind. Salutations to you, salutations to you. ॥ 311॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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