Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.309: आप यज्ञ करने वाले और अथर्ववेद के स्वरूप 'शंयु' नामक देवता के प्रसाद हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ। आप सभी कष्टों के नाश करने वाले और दुःखों को दूर करने वाले हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। 309। | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप यज्ञ करने वाले और अथर्ववेद के स्वरूप 'शंयु' नामक देवता के प्रसाद हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ। आप सभी कष्टों के नाश करने वाले और दुःखों को दूर करने वाले हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। 309।
You are the prasad of the deity named 'Shanyu' who performs sacrifices and is the form of Atharvaveda. I salute you again and again. I salute you, I salute you, who is the destroyer of all sufferings and relieves sorrow. 309.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥