श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 306
 
 
श्लोक  13.15.306 
नमो दिग्वाससे नित्यमधिवाससुवाससे।
नमो जगन्निवासाय प्रतिपत्तिसुखाय च॥ ३०६॥
 
 
अनुवाद
आप दिगंबर हैं। आपको नमस्कार है। आप सबके निवास स्थान हैं और सुंदर वस्त्र धारण करते हैं। समस्त जगत् आपमें निवास करता है। सभी सिद्धियों का सुख आपको सहज ही उपलब्ध है। आपको नमस्कार है। 306।
 
You are Digambara. Salutations to you. You are the abode of all and wear beautiful clothes. The entire world resides in you. The happiness of all accomplishments is easily available to you. Salutations to you. 306.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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