श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 303
 
 
श्लोक  13.15.303 
मणिभूषितमूर्धाय नमश्चन्द्रार्धभूषिणे।
विचित्रमणिमूर्धाय कुसुमाष्टधराय च॥ ३०३॥
 
 
अनुवाद
आपका मस्तक दिव्य मणि से सुशोभित है। आपके मस्तक पर अर्धचंद्राकार आभूषण है। आपका मस्तक एक विचित्र मणि की आभा से प्रकाशित है और आप आठ पुष्प धारण करते हैं।
 
Your head is adorned with a divine gem. You wear a crescent-moon ornament on your forehead. Your head is illuminated by the radiance of a strange gem and you hold eight flowers.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas