श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 302
 
 
श्लोक  13.15.302 
नमो रक्ताग्रवासाय रक्तसूत्रधराय च।
रक्तमालाविचित्राय रक्ताम्बरधराय च॥ ३०२॥
 
 
अनुवाद
आपके सुंदर वस्त्र लाल रंग के हैं। आप लाल धागा धारण करते हैं। लाल माला से आपकी शोभा अद्वितीय है। लाल वस्त्र धारण करने वाले रुद्रदेव, आपको नमस्कार है।
 
Your beautiful clothes are of red colour. You wear a red thread. You have a unique beauty with a red garland. Salutations to you Rudradeva who wears red clothes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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