Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.15.300: प्रमथ आपका गुणगान करते हैं। आप सदैव अपने पार्षदों के साथ व्यस्त रहते हैं। प्रमथ आपके प्रत्येक मार्ग पर आपका अनुसरण करते हैं। आपकी सेवा करना गणों का नित्य व्रत है। आपको नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 300
 
 
श्लोक  13.15.300 
नमोऽस्तु गणगीताय गणवृन्दरताय च।
गणानुयातमार्गाय गणनित्यव्रताय च॥ ३००॥
 
 
अनुवाद
प्रमथ आपका गुणगान करते हैं। आप सदैव अपने पार्षदों के साथ व्यस्त रहते हैं। प्रमथ आपके प्रत्येक मार्ग पर आपका अनुसरण करते हैं। आपकी सेवा करना गणों का नित्य व्रत है। आपको नमस्कार है।
 
The Pramaths sing your praises. You are always busy with your councillors. The Pramaths follow you on every path you take. Serving you is the constant vow of the Ganas. Salutations to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)