श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 298
 
 
श्लोक  13.15.298 
नम: श्यामाय गौराय अर्धपीतार्धपाण्डवे।
नारीनरशरीराय स्त्रीपुंसाय नमोऽस्तु ते॥ २९८॥
 
 
अनुवाद
आप हरिहर हैं, इसलिए आपका आधा शरीर श्याम वर्ण का और आधा श्वेत वर्ण का है। आप आधे शरीर पर पीले वस्त्र और आधे शरीर पर श्वेत वस्त्र धारण करते हैं। आपको नमस्कार है। आपके शरीर का आधा भाग स्त्रियों के अंगों वाला और आधा भाग पुरुषों के अंगों वाला है। आप स्त्री और पुरुष दोनों के स्वरूप वाले हैं। आपको नमस्कार है॥ 298॥
 
Because you are Harihara, half of your body is dark and the other half is fair. You wear yellow clothes on half of your body and white clothes on the other half. Salutations to you. Half of your body has female parts and the other half has male parts. You have the form of both male and female. Salutations to you.॥ 298॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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