श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 297
 
 
श्लोक  13.15.297 
नम: सोमाय सौम्याय सौम्यवक्त्रधराय च।
सौम्यरूपाय मुख्याय सौम्यदंष्ट्राविभूषिणे॥ २९७॥
 
 
अनुवाद
आप सोमस्वरूप हैं। आपका स्वरूप अत्यंत सौम्य है। आपका मुख सौम्य है। आपका स्वरूप भी सौम्य है। आप मुख्य देवता हैं और कोमल दांतों से सुशोभित हैं। आपको नमस्कार है॥ 297॥
 
You are the form of Soma. Your form is very gentle. You have a gentle face. Your appearance is also gentle. You are the main deity and are adorned with gentle teeth. Salutations to you.॥ 297॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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