श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 296
 
 
श्लोक  13.15.296 
नम आदित्यवक्त्राय आदित्यनयनाय च।
नम आदित्यवर्णाय आदित्यप्रतिमाय च॥ २९६॥
 
 
अनुवाद
आपका मुख सूर्य के समान तेजस्वी है। सूर्य आपकी आँख है। आपके शरीर की प्रभा भी सूर्य के समान है और अत्यधिक सादृश्य के कारण आप सूर्य के प्रतिबिम्ब के समान प्रतीत होते हैं।
 
Your face is as radiant as the Sun. The Sun is your eye. The glow of your body is also like that of the Sun and due to the great resemblance you appear like the Sun's image.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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