श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 295
 
 
श्लोक  13.15.295 
नम: पद्मार्धमालाय उत्पलैर्मिश्रिताय च।
अर्धचन्दनलिप्ताय अर्धस्रगनुलेपिने॥ २९५॥
 
 
अनुवाद
आप अपने आधे शरीर को कमल की माला से और आधे शरीर को कमल के फूलों से सुशोभित करते हैं। आप अपने आधे शरीर पर चंदन का लेप लगाते हैं और आधे शरीर पर फूलों की माला और सुगंधित अंगराग धारण करते हैं। इस अर्धनारीश्वर रूप में आपको नमस्कार है।
 
You adorn half of your body with a garland of lotuses and the other half with lotus flowers. You apply sandalwood paste on the other half and wear a garland of flowers and perfumed cosmetics on the other half. Salutations to you in this Ardhanarishwar form.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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