श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 292
 
 
श्लोक  13.15.292 
रक्तध्वजपताकाय रक्तस्रगनुलेपिने।
नमोऽस्तु पीतवर्णाय पीताम्बरधराय च॥ २९२॥
 
 
अनुवाद
आप लाल वस्त्र धारण करते हुए अपनी ध्वजा और पताका भी लाल रखते हैं। आप लाल पुष्पों की माला पहनते हैं और शरीर पर लाल चंदन का लेप लगाते हैं। कभी-कभी आपके शरीर का रंग पीला पड़ जाता है। ऐसे समय में आप पीले वस्त्र धारण करते हैं। आपको नमस्कार है॥292॥
 
While wearing red clothes, you also keep your flag and banner red. You wear a garland of red flowers and apply red sandalwood paste on your body. At times, your body colour turns yellow. At such times, you wear yellow clothes. Salutations to you.॥ 292॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas