श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 290
 
 
श्लोक  13.15.290 
कृष्णाजिनोत्तरीयाय कृष्णाष्टमिरताय च।
शुक्लवर्णाय शुक्लाय शुक्लाम्बरधराय च॥ २९०॥
 
 
अनुवाद
काले मृगचर्म का वस्त्र आपका है। आप श्रीकृष्णाष्टमी व्रत करने में तत्पर रहती हैं। आपका रंग श्वेत है। आप दिखने में भी शुद्ध हैं और श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। आपको नमस्कार है॥ 290॥
 
Black deerskin is your scarf. You remain ready to observe the Sri Krishnashtami fast. Your complexion is white. You are also pure in appearance and you wear white clothes. Salutations to you.॥ 290॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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