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mahabharat 13.15.284-285h: इन्द्र ने उत्तम शतरुद्रिय का पाठ करते हुए परब्रह्म शिव की स्तुति की। ब्रह्मा, नारायण और देवराज इन्द्र - ये तीनों महात्मा तीन अग्नियों के समान प्रकाशित हो रहे थे। 284 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 284-285h
 
 
श्लोक  13.15.284-285h 
गृणन् ब्रह्म परं शक्र: शतरुद्रियमुत्तमम्।
ब्रह्मा नारायणश्चैव देवराजश्च कौशिक:॥ २८४॥
अशोभन्त महात्मानस्त्रयस्त्रय इवाग्नय:।
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने उत्तम शतरुद्रिय का पाठ करते हुए परब्रह्म शिव की स्तुति की। ब्रह्मा, नारायण और देवराज इन्द्र - ये तीनों महात्मा तीन अग्नियों के समान प्रकाशित हो रहे थे। 284 1/2॥
 
Indra praised Parabrahma Shiva while reciting the excellent Shatrudriya. Brahma, Narayan and Devraj Indra – these three Mahatmas were glowing like three fires. 284 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)