श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 282-283
 
 
श्लोक  13.15.282-283 
ब्रह्मा भवं तदास्तौषीद् रथन्तरमुदीरयन्॥ २८२॥
ज्येष्ठसाम्ना च देवेशं जगौ नारायणस्तदा॥ २८३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने उस समय रथन्तर सामक का पाठ करके भगवान शंकर की स्तुति की। नारायण ने ज्येष्ठ समद के माध्यम से भगवान शिव की महिमा का गान किया।
 
Brahmaji praised Lord Shankar at that time by reciting Rathantar Samaka. Narayan sang the glory of Lord Shiva through Jyeshtha Samad.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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