श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 280
 
 
श्लोक  13.15.280 
स्वायम्भुवाद्या मनवो भृग्वाद्या ऋषयस्तथा।
शक्राद्या देवताश्चैव सर्व एव समभ्ययु:॥ २८०॥
 
 
अनुवाद
स्वायम्भुव आदि मनु, भृगु आदि ऋषिगण तथा इन्द्र आदि देवता- ये सभी वहाँ आ पहुँचे थे ॥280॥
 
Swayambhuva etc. Manu, Bhrigu etc. sages and Indra etc. gods – all of them had arrived there. 280॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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