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mahabharat 13.15.275: हे निष्पाप श्रीकृष्ण! बुद्धिमान भगवान शिव के पास असंख्य दिव्यास्त्र हैं। मैंने यहाँ तुम्हारे सामने उन प्रमुख अस्त्रों का वर्णन किया है ॥275॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.275 
असंख्येयानि चास्त्राणि तस्य दिव्यानि धीमत:।
प्राधान्यतो मयैतानि कीर्तितानि तवानघ॥ २७५॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप श्रीकृष्ण! बुद्धिमान भगवान शिव के पास असंख्य दिव्यास्त्र हैं। मैंने यहाँ तुम्हारे सामने उन प्रमुख अस्त्रों का वर्णन किया है ॥275॥
 
Sinless Shri Krishna! Intelligent Lord Shiva has innumerable divine weapons. I have described these main weapons in front of you here. 275॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)