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श्लोक 13.15.273  |
त्रि:सप्तकृत्व: पृथिवी येन नि:क्षत्रिया कृता।
जामदग्न्येन गोविन्द रामेणाक्लिष्टकर्मणा॥ २७३॥ |
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| अनुवाद |
| गोविन्द! अनायास ही महान् कर्म करने वाले जमदग्निपुत्र परशुराम ने एक ही फरसे से इक्कीस बार इस पृथ्वी को क्षत्रियविहीन कर दिया था। |
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| Govind! Jamadagni's son Parashurama, who performed great deeds without any effort, had made this earth devoid of Kshatriyas twenty-one times with the same axe. |
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