Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.270-271h: गोविन्द! वह काला त्रिशूल अपनी धूम्ररहित ज्वालाओं के साथ प्रलयकाल के सूर्य के समान उदय हुआ था; और हाथ में सर्प लिए हुए वह पाश धारण किए हुए अवर्णनीय पराक्रमी यमराज के समान प्रतीत हो रहा था। मैंने उसे भगवान रुद्र के निकट देखा था। | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गोविन्द! वह काला त्रिशूल अपनी धूम्ररहित ज्वालाओं के साथ प्रलयकाल के सूर्य के समान उदय हुआ था; और हाथ में सर्प लिए हुए वह पाश धारण किए हुए अवर्णनीय पराक्रमी यमराज के समान प्रतीत हो रहा था। मैंने उसे भगवान रुद्र के निकट देखा था।
Govind! That black trident with its smokeless flames had risen like the sun at the time of doomsday; and with a serpent in his hand it looked like the indescribably powerful Yamaraja holding a noose. I had seen him near Lord Rudra. 270 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥