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mahabharat 13.15.265-266: त्रिशूलधारी भगवान शंकर का त्रिशूल नामक अस्त्र, जो सम्पूर्ण लोकों में प्रसिद्ध है, त्रिशूलधारी भगवान शंकर द्वारा छोड़े जाने पर इस सम्पूर्ण पृथ्वी को छेद सकता है, समुद्र को सुखा सकता है अथवा सम्पूर्ण जगत् का विनाश कर सकता है ॥265-266॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 265-266
 
 
श्लोक  13.15.265-266 
यत् तच्छूलमिति ख्यातं सर्वलोकेषु शूलिन:॥ २६५॥
दारयेद् यां महीं कृत्स्नां शोषयेद् वा महोदधिम्।
संहरेद् वा जगत‍् कृत्स्नं विसृष्टं शूलपाणिना॥ २६६॥
 
 
अनुवाद
त्रिशूलधारी भगवान शंकर का त्रिशूल नामक अस्त्र, जो सम्पूर्ण लोकों में प्रसिद्ध है, त्रिशूलधारी भगवान शंकर द्वारा छोड़े जाने पर इस सम्पूर्ण पृथ्वी को छेद सकता है, समुद्र को सुखा सकता है अथवा सम्पूर्ण जगत् का विनाश कर सकता है ॥265-266॥
 
The weapon called Trishul (Trident) of Lord Shankar, who holds the trident, which is famous in all the worlds, when released by the trident-wielding Lord Shankar, can pierce this entire earth, dry up the ocean or destroy the entire world. ॥265-266॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)