श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 262
 
 
श्लोक  13.15.262 
येन तत् त्रिपुरं दग्ध्वा क्षणाद् भस्मीकृतं पुरा।
शरेणैकेन गोविन्द महादेवेन लीलया॥ २६२॥
 
 
अनुवाद
हे गोविन्द! उसी प्रकार महादेवजी ने खेल-खेल में एक ही बाण चलाया और क्षण भर में राक्षसों की तीनों नगरियों को जला डाला॥262॥
 
Govind! With the same, Mahadevji playfully shot a single arrow and in a moment burnt down all the three cities of the demons.॥ 262॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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