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श्लोक 13.15.262  |
येन तत् त्रिपुरं दग्ध्वा क्षणाद् भस्मीकृतं पुरा।
शरेणैकेन गोविन्द महादेवेन लीलया॥ २६२॥ |
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| अनुवाद |
| हे गोविन्द! उसी प्रकार महादेवजी ने खेल-खेल में एक ही बाण चलाया और क्षण भर में राक्षसों की तीनों नगरियों को जला डाला॥262॥ |
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| Govind! With the same, Mahadevji playfully shot a single arrow and in a moment burnt down all the three cities of the demons.॥ 262॥ |
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