श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 261
 
 
श्लोक  13.15.261 
ब्राह्मान्नारायणाच्चैन्द्रादाग्नेयादपि वारुणात्।
यद् विशिष्टं महाबाहो सर्वशस्त्रविघातनम्॥ २६१॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु! वह पाशुपत अस्त्र, जो सब अस्त्रों को नष्ट कर देता है, ब्रह्मा, नारायण, ऐन्द्र, आग्नेय और वरुण के अस्त्रों से भी अधिक शक्तिशाली था ॥261॥
 
Great arms! That Pashupat weapon, which destroys all weapons, was more powerful than the weapons of Brahma, Narayan, Aindra, Aagneya and Varun. 261॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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