श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.15.26 
वासुदेव उवाच
शुश्रूषध्वं ब्राह्मणेन्द्रास्त्वं च तात युधिष्ठिर।
त्वं चापगेय नामानि शृणुष्वेह कपर्दिने॥ २६॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले, "हे यहाँ बैठे हुए ब्राह्मण नेताओं! हे युधिष्ठिर और गंगापुत्र भीष्म! आप सब लोग यहाँ भगवान शंकर के नामों का भी श्रवण करें।"
 
Lord Krishna said, "O Brahmin leaders sitting here! Listen, dear Yudhishthira and Ganga's son Bhishma! You all should also listen to the names of Lord Shankar here." 26.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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