श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 255
 
 
श्लोक  13.15.255 
मूर्तिमन्ति तथास्त्राणि सर्वतेजोमयानि च।
मया दृष्टानि गोविन्द भवस्यामिततेजस:॥ २५५॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! मैंने अमित तेजस्वी महादेवजी के समस्त तेजस्वी आयुधों को मूर्तिरूप में उनकी सेवा में उपस्थित देखा था ॥255॥
 
Govind! I had seen all the brilliant weapons of Amit Tejaswi Mahadevji present in his service in the form of an idol. 255॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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