Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.253: भगवान शिव के मस्तक पर चन्द्रमा का मुकुट सुशोभित था। उनका रंग श्वेत था। वे शरद ऋतु के पूर्णिमा के समान उदय हुए थे। उनके तीन नेत्रों से ऐसी ज्योति निकल रही थी मानो तीन सूर्य उदय हो गए हों। | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवान शिव के मस्तक पर चन्द्रमा का मुकुट सुशोभित था। उनका रंग श्वेत था। वे शरद ऋतु के पूर्णिमा के समान उदय हुए थे। उनके तीन नेत्रों से ऐसी ज्योति निकल रही थी मानो तीन सूर्य उदय हो गए हों।
Lord Shiva's head was adorned with a crown of the moon. His complexion was white. He had risen like the full moon of autumn season. His three eyes were emitting such a beam of light as if three suns had risen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥