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mahabharat 13.15.252: वे अपने समान ही शक्तिशाली दिव्य साथियों से घिरे हुए थे। उनके साथी हर जगह गा रहे थे, नाच रहे थे और वाद्य यंत्र बजा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 252
 
 
श्लोक  13.15.252 
गायद्भिर्नृत्यमानैश्च वादयद्भिश्च सर्वश:।
वृतं पार्श्वचरैर्दिव्यैरात्मतुल्यपराक्रमै:॥ २५२॥
 
 
अनुवाद
वे अपने समान ही शक्तिशाली दिव्य साथियों से घिरे हुए थे। उनके साथी हर जगह गा रहे थे, नाच रहे थे और वाद्य यंत्र बजा रहे थे।
 
He was surrounded by divine companions who were equally powerful as himself. His companions were singing, dancing and playing musical instruments everywhere. 252.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)