श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 251
 
 
श्लोक  13.15.251 
शुक्लाम्बरधरं देवं शुक्लमाल्यानुलेपनम्।
शुक्लध्वजमनाधृष्यं शुक्लयज्ञोपवीतिनम्॥ २५१॥
 
 
अनुवाद
महादेवजी श्वेत वस्त्र धारण करते थे। उनके शरीर के अंगों पर श्वेत चंदन का लेप लगा हुआ था। उनका ध्वज भी श्वेत रंग का था। वे श्वेत रंग का जनेऊ धारण करते थे और अजेय थे।
 
Mahadevji wore white clothes. His body parts were smeared with white sandalwood paste. His flag was also of white colour. He wore white coloured sacred thread and was invincible. 251.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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