श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 246-247h
 
 
श्लोक  13.15.246-247h 
ईश्वर: सुमहातेजा: संवर्तक इवानल:॥ २४६॥
युगान्ते सर्वभूतानां दिधक्षुरिव चोद्यत:।
 
 
अनुवाद
वे अत्यंत तेजस्वी महेश्वर ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो कल्पान्त के समय प्रलयकाल की अग्नि सम्पूर्ण भूतों को जलाने की इच्छा से प्रज्वलित हो गई हो ॥246 1/2॥
 
That very brilliant Maheshwar looked as if the fire of the doomsday had ignited with the desire to burn all the ghosts at the time of Kalpanta. 246 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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