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mahabharat 13.15.245-246h: उनके तेज से निकली अग्नि की चमक ने गरजते बादलों सहित सम्पूर्ण आकाश को ढक लिया और हजारों सूर्यों के समान चमकने लगी।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 245-246h
 
 
श्लोक  13.15.245-246h 
तस्य तेजोभवो वह्नि: समेघ: स्तनयित्नुमान्॥ २४५॥
सहस्रमिव सूर्याणां सर्वमापूर्य धिष्ठित:।
 
 
अनुवाद
उनके तेज से निकली अग्नि की चमक ने गरजते बादलों सहित सम्पूर्ण आकाश को ढक लिया और हजारों सूर्यों के समान चमकने लगी।
 
The fiery radiance which emanated from his brilliance covered the entire sky along with the roaring clouds and shone like thousands of Suns.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)