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mahabharat 13.15.243: उसके आस-पास का क्षेत्र भी बहुत आकर्षक था। उसके कंधे चौड़े थे और उसका रूप सुंदर था। वह देखने में बहुत आकर्षक लग रहा था। उसका कुबड़ा ऊँचा उठा हुआ था, जो उसके पूरे कंधे को ढँक रहा था। वह बहुत सुंदर लग रहा था। 243   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 243
 
 
श्लोक  13.15.243 
सुपार्श्वं विपुलस्कन्धं सुरूपं चारुदर्शनम्।
ककुदं तस्य चाभाति स्कन्धमापूर्य धिष्ठितम्॥ २४३॥
 
 
अनुवाद
उसके आस-पास का क्षेत्र भी बहुत आकर्षक था। उसके कंधे चौड़े थे और उसका रूप सुंदर था। वह देखने में बहुत आकर्षक लग रहा था। उसका कुबड़ा ऊँचा उठा हुआ था, जो उसके पूरे कंधे को ढँक रहा था। वह बहुत सुंदर लग रहा था। 243
 
The area around him was also very attractive. His shoulders were broad and his form was beautiful. He appeared very charming to look at. His hunchback was raised high, covering his entire shoulder. He was looking very beautiful. 243.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)