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mahabharat 13.15.242: उनका सम्पूर्ण शरीर जम्बुण्ड नामक स्वर्णिम धागों से सुशोभित था। उनका मुख, खुर, नासिका, कान और कटि प्रदेश- सभी अत्यन्त सुन्दर थे।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 242
 
 
श्लोक  13.15.242 
जाम्बूनदेन दाम्ना च सर्वत: समलंकृतम्।
सुवक्त्रखुरनासं च सुकर्णं सुकटीतटम्॥ २४२॥
 
 
अनुवाद
उनका सम्पूर्ण शरीर जम्बुण्ड नामक स्वर्णिम धागों से सुशोभित था। उनका मुख, खुर, नासिका, कान और कटि प्रदेश- सभी अत्यन्त सुन्दर थे।
 
His body was decorated all over with golden strings called Jambunda. His face, hooves, nose (nostrils), ears and waist region – all were very beautiful. 242.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)