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mahabharat 13.15.24: अतः मैं तुम्हारे समक्ष दैत्यों का नाश करने वाले भगवान शंकर के कुछ गुणों का यथावत् वर्णन करूँगा॥24॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.15.24 
तस्याहमसुरघ्नस्य कांश्चिद् भगवतो गुणान्।
भवतां कीर्तयिष्यामि व्रतेशाय यथातथम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं तुम्हारे समक्ष दैत्यों का नाश करने वाले भगवान शंकर के कुछ गुणों का यथावत् वर्णन करूँगा॥24॥
 
Therefore, I will accurately describe before you some of the qualities of Lord Shankar, the destroyer of demons. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)