श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 235
 
 
श्लोक  13.15.235 
पुंल्लिङ्गं सर्वमीशानं स्त्रीलिङ्गं विद्धि चाप्युमाम्।
द्वाभ्यां तनुभ्यां व्याप्तं हि चराचरमिदं जगत‍्॥ २३५॥
 
 
अनुवाद
जो कुछ पुरुष है वह शिवस्वरूप है और जो कुछ स्त्री है वह उमा है। यह सम्पूर्ण जड़-चेतन जगत् महेश्वर और उमा इन दो शरीरों से व्याप्त है॥ 235॥
 
All that is masculine is Shiva's form and all that is feminine is Uma. This entire animate and inanimate world is pervaded by these two bodies - Maheshwar and Uma.॥ 235॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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