Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.234: संसार में जितनी भी स्त्रियाँ हैं, वे सब पार्वतीजी के कारणस्वरूप से उत्पन्न हुई हैं; इसलिए वे योनि के चिह्न से चिन्हित हैं और सभी पुरुष भगवान शिव से उत्पन्न होने के कारण लिंग के चिह्न से चिन्हित हैं - यह तो सभी को स्पष्ट है। ऐसी स्थिति में जो कोई शिव और पार्वती को छोड़कर अन्य कारण बताता है, जिसके कारण प्रजा चिन्हित नहीं होती, वह मूर्ख पुरुष जो किसी अन्य कारण को मानता है, वह जड़-चेतन प्राणियों सहित तीनों लोकों से निष्कासित होने का अधिकारी है ॥234॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संसार में जितनी भी स्त्रियाँ हैं, वे सब पार्वतीजी के कारणस्वरूप से उत्पन्न हुई हैं; इसलिए वे योनि के चिह्न से चिन्हित हैं और सभी पुरुष भगवान शिव से उत्पन्न होने के कारण लिंग के चिह्न से चिन्हित हैं - यह तो सभी को स्पष्ट है। ऐसी स्थिति में जो कोई शिव और पार्वती को छोड़कर अन्य कारण बताता है, जिसके कारण प्रजा चिन्हित नहीं होती, वह मूर्ख पुरुष जो किसी अन्य कारण को मानता है, वह जड़-चेतन प्राणियों सहित तीनों लोकों से निष्कासित होने का अधिकारी है ॥234॥
All the women in the world have been born from the causal nature of Goddess Parvati; therefore, they are marked with the mark of the vagina and all men, being born from Lord Shiva, are marked with the mark of the penis - this is evident to all. In such a situation, whoever gives the reason other than Shiva and Parvati, due to which the people are not marked, that foolish man who believes in any other reason, deserves to be expelled from the three worlds along with the animate and inanimate creatures. ॥234॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥