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mahabharat 13.15.233: प्रजा के शरीर पर कमल, चक्र या वज्र का कोई चिह्न नहीं है। सब प्रजा में लिंग और भगवद् के चिह्न हैं, अतः सिद्ध है कि सब प्रजा माहेश्वरी (महादेवजी से ही उत्पन्न) हैं॥ 233॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 233
 
 
श्लोक  13.15.233 
न पद्माङ्का न चक्राङ्का न वज्राङ्का यत: प्रजा:।
लिङ्गाङ्का च भगाङ्का च तस्मान्माहेश्वरी प्रजा॥ २३३॥
 
 
अनुवाद
प्रजा के शरीर पर कमल, चक्र या वज्र का कोई चिह्न नहीं है। सब प्रजा में लिंग और भगवद् के चिह्न हैं, अतः सिद्ध है कि सब प्रजा माहेश्वरी (महादेवजी से ही उत्पन्न) हैं॥ 233॥
 
There is no sign of lotus, chakra or thunderbolt on the body of the subjects. All the subjects have the signs of Linga and Bhagwad, hence it is proved that all the subjects are Maheshwari (born from Mahadevji only).॥ 233॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)