श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 231
 
 
श्लोक  13.15.231 
कस्यान्यस्य सुरै: सर्वैर्लिङ्गं मुक्त्वा महेश्वरम्।
अर्च्यतेऽर्चितपूर्वं वा ब्रूहि यद्यस्ति ते श्रुति:॥ २३१॥
 
 
अनुवाद
भगवान महेश्वर को छोड़कर अन्य सभी देवता किसके लिंग की पूजा करते हैं अथवा उन्होंने पहले कभी उसकी पूजा की है? यदि आपने सुना हो तो कृपया बताइए॥ 231॥
 
Whose Linga is worshipped by all the other gods except Lord Maheshwar or have they ever worshipped it before? If you have heard of it, please tell.॥ 231॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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