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श्लोक 13.15.231  |
कस्यान्यस्य सुरै: सर्वैर्लिङ्गं मुक्त्वा महेश्वरम्।
अर्च्यतेऽर्चितपूर्वं वा ब्रूहि यद्यस्ति ते श्रुति:॥ २३१॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान महेश्वर को छोड़कर अन्य सभी देवता किसके लिंग की पूजा करते हैं अथवा उन्होंने पहले कभी उसकी पूजा की है? यदि आपने सुना हो तो कृपया बताइए॥ 231॥ |
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| Whose Linga is worshipped by all the other gods except Lord Maheshwar or have they ever worshipped it before? If you have heard of it, please tell.॥ 231॥ |
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