श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 230
 
 
श्लोक  13.15.230 
हेतुभिर्वा किमन्यैस्तैरीश: कारणकारणम्।
न शुश्रुम यदन्यस्य लिङ्गमभ्यर्चितं सुरै:॥ २३०॥
 
 
अनुवाद
अन्य कारण बताने से क्या लाभ? भगवान शंकर ही समस्त कारणों के कारण सिद्ध होते हैं, क्योंकि देवताओं द्वारा अन्य किसी लिंग की पूजा होते हुए हमने नहीं सुना है॥230॥
 
What is the use of telling other reasons? Lord Shankar is proved to be the cause of all the reasons because we have not heard of any other Lingam being worshipped by the gods.॥ 230॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas