| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन » श्लोक 224 |
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| | | | श्लोक 13.15.224  | स्थूलं सूक्ष्ममनौपम्यमग्राह्यं गुणगोचरम्।
गुणहीनं गुणाध्यक्षं परं माहेश्वरं पदम्॥ २२४॥ | | | | | | अनुवाद | | महादेवजी का परमपद स्थूल, सूक्ष्म, तुलना रहित, इन्द्रियों द्वारा अगोचर, सगुण, निर्गुण और गुणों का नियामक है ॥224॥ | | | | Mahadevji's Parampad is gross, subtle, without comparison, imperceptible by the senses, regulator of sagun, nirgun and gunas. 224॥ | | ✨ ai-generated | | |
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