श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 223
 
 
श्लोक  13.15.223 
कर्मयज्ञक्रियायोगै: सेव्यमान: सुरासुरै:।
नित्यं कर्मफलैर्हीनं तमहं कारणं वदे॥ २२३॥
 
 
अनुवाद
जो कर्मफल से रहित हैं, जिनकी सेवा समस्त देवता और दानव अपने कर्मों, यज्ञों और कर्मों द्वारा सदैव करते हैं, उन महादेव जी को मैं इन सबका कारण कहता हूँ ॥223॥
 
I call that Mahadev Ji, who is without the fruits of actions, whom all the gods and demons always serve through their deeds, sacrifices and activities, the cause of all this. ॥ 223॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas