श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 222
 
 
श्लोक  13.15.222 
ज्ञानसिद्धिक्रियायोगै: सेव्यमानश्च योगिभि:।
ऋषिगन्धर्वसिद्धैश्च विहितं कारणं परम्॥ २२२॥
 
 
अनुवाद
योगीजन अपने ज्ञान, सिद्धि और क्रियायोग के द्वारा भगवान शिव की सेवा करते हैं; तथा ऋषि, गन्धर्व और सिद्धगण उन्हें ही परम कारण मानकर उनकी शरण लेते हैं ॥222॥
 
The Yogis serve Lord Shiva through their knowledge, accomplishments and Kriya-Yoga; and the sages, Gandharvas and Siddhas take refuge in Him, considering Him to be the ultimate cause. ॥222॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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