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mahabharat 13.15.219: भगवान शंकर के समान ऐश्वर्य किसके पास है? भूतों के साथ कौन क्रीड़ा करता है? हे प्रभु! जिनके दरबारी अपने स्वामी के समान बलवान हैं और अपने ऐश्वर्य पर गर्व करते हैं?॥219॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  13.15.219 
कस्यैश्वर्यं समानं च भूतै: को वापि क्रीडते।
कस्य तुल्यबला देव गणाश्चैश्वर्यदर्पिता:॥ २१९॥
 
 
अनुवाद
भगवान शंकर के समान ऐश्वर्य किसके पास है? भूतों के साथ कौन क्रीड़ा करता है? हे प्रभु! जिनके दरबारी अपने स्वामी के समान बलवान हैं और अपने ऐश्वर्य पर गर्व करते हैं?॥219॥
 
Who else has the opulence like Lord Shankar? Who plays with the ghosts? O God! Whose courtiers are as powerful as their master and are proud of their opulence?॥ 219॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)