श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  13.15.216 
सुरासुरगुरोर्वक्त्रे कस्य रेत: पुरा हुतम्।
कस्य वान्यस्य रेतस्तद् येन हैमो गिरि: कृत:॥ २१६॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में देवासुरगुरु अग्निदेव के मुख में महादेवजी के अतिरिक्त किस अन्य देवता का वीर्य अर्पित किया गया था? जिस वीर्य से सुवर्णमय मेरुदण्ड का निर्माण हुआ, वह भगवान शिव के अतिरिक्त किस देवता का वीर्य था? 216॥
 
In ancient times, apart from Mahadevji, which other god's semen was offered to the mouth of Devasuraguru Agni? The semen through which the golden spinal cord was formed was the semen of which god other than Lord Shiva? 216॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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