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mahabharat 13.15.214-215: मुझे बताइए, भगवान महेश्वर के अतिरिक्त और कौन है जो अंधक, शुक्र, दुन्दुभि, महिष, यक्षराज कुबेर की सेना के दैत्यों तथा निवातकवच नामक दैत्यों को वर प्रदान कर उनका नाश कर सके? ॥214-215॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 214-215
 
 
श्लोक  13.15.214-215 
अन्धकस्याथ शुक्रस्य दुन्दुभेर्महिषस्य च॥ २१४॥
यक्षेन्द्रबलरक्ष:सु निवातकवचेषु च।
वरदानावघाताय ब्रूहि कोऽन्यो महेश्वरात्॥ २१५॥
 
 
अनुवाद
मुझे बताइए, भगवान महेश्वर के अतिरिक्त और कौन है जो अंधक, शुक्र, दुन्दुभि, महिष, यक्षराज कुबेर की सेना के दैत्यों तथा निवातकवच नामक दैत्यों को वर प्रदान कर उनका नाश कर सके? ॥214-215॥
 
Tell me, who other than Lord Maheshwar is capable of granting blessings to Andhaka, Shukra, Dundubhi, Mahisha, the demons in the army of Yaksharaj Kubera and the demons named Nivatakavach and destroying them? ॥214-215॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)