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mahabharat 13.15.213-214h: जब देवताओं, यक्षों, नागों और राक्षसों में संघर्ष होता है और परस्पर विनाश की संभावना उत्पन्न होती है, तब भगवान शिव ही उन्हें अपने-अपने स्थान और समृद्धि में लौटने में सहायता करते हैं। ॥213 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 213-214h
 
 
श्लोक  13.15.213-214h 
अभिघातेषु देवानां सयक्षोरगरक्षसाम्॥ २१३॥
परस्परविनाशेषु स्वस्थानैश्वर्यदो भव:।
 
 
अनुवाद
जब देवताओं, यक्षों, नागों और राक्षसों में संघर्ष होता है और परस्पर विनाश की संभावना उत्पन्न होती है, तब भगवान शिव ही उन्हें अपने-अपने स्थान और समृद्धि में लौटने में सहायता करते हैं। ॥213 1/2॥
 
When there is a conflict between the gods, yakshas, ​​serpents and demons and a possibility of mutual destruction arises, it is only Lord Shiva who helps them to return to their respective places and prosperity. ॥213 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)