Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.15.210: इन्द्र! समस्त चेतन और जड़ पदार्थों में जो 'यह ऐसा है' ऐसा लक्षण देखा जाता है, वह अव्यक्त, खुले हुए केश वाले और सर्वव्यापी महादेवजी के प्रभाव से प्रकट होता है; अतः तू सब कुछ महेश्वर से ही उत्पन्न हुआ समझ॥ 210॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 210
 
 
श्लोक  13.15.210 
अव्यक्तमुक्तकेशाय सर्वगस्येदमात्मकम्।
चेतनाचेतनाद्येषु शक्र विद्धि महेश्वरात्॥ २१०॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र! समस्त चेतन और जड़ पदार्थों में जो 'यह ऐसा है' ऐसा लक्षण देखा जाता है, वह अव्यक्त, खुले हुए केश वाले और सर्वव्यापी महादेवजी के प्रभाव से प्रकट होता है; अतः तू सब कुछ महेश्वर से ही उत्पन्न हुआ समझ॥ 210॥
 
Indra! The characteristic that is seen in all sentient and inanimate objects, that 'it is like this', is manifested by the influence of the unmanifested, open-haired and omnipresent Mahadevji; therefore, understand that everything has originated from Maheshwar.॥ 210॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)